यहाँ "हिंदी ही क्यों ?" विषय पर विभिन्न विद्वानों के मत प्रस्तुत किए जा रहे हैं। हिंदी और अँग्रेज़ी का संघर्ष आज का नहीं परंतु यह समस्या आज भी उतनी ही ज्वलंत है जितनी स्वतंत्रता से पूर्व थी।
राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
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