कुछ जीत हुई, कुछ हार हुई
दिन-रात रटें कविता-कविता
कुछ आन रही, कुछ शान रही
हर बात रटें कविता-कविता
हर मौसिम में सरदी गरमी
बरसात, रटें कविता-कविता
उफ, जात रहे न रहे जग में,
कमजात रटें कविता-कविता
- कौतुक बनारसी
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