एक वहम है ज़िंदग़ी, कर्मों का है खेल।
सच तो है बस मौत ये, दुनिया है इक जेल॥

कर्म सही तो सब सही, पटरी पर है रेल।
बुरा भला कोई नहीं, क़ुदरत का सब खेल॥

हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।
सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात॥

आज यहाँ तो कल वहाँ, जग में फिरे फ़क़ीर।
अच्छे दिन की आस में, नैनन बरसे नीर॥

सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।
उसकी दुकान झूठ की, धन्धा है मत रूठ॥

फ़रियादी अब कर रहे, क़ातिल से फ़रियाद।
बुज़दिल इतना मत बनो, सब कुछ हो बर्बाद॥

राजा अच्छा है वही, कर जो करे मुआफ़।
भेद-भाव भी मत करे, सही करे इंसाफ़॥

-निज़ाम फतेहपुरी
ग्राम व पोस्ट मदोकीपुर
ज़िला- फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) भारत
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