यहाँ प्रेमचंद पर लिखे गए विभिन्न संकलनों व निबंधों को संग्रहीत किया जा रहा है।
दक्षिण की हिंदी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। - के.सी. सारंगमठ
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