पिछले साल
करोड़ों का हुआ घोटाला
घोटाले में फंस गया
मंत्री जी का साला
विपक्ष ने भी
इस मामले को खूब उछाला
तब मंत्रीजी ने
सरल-सुगम रास्ता निकाला
विपक्षी दल के नेता के पुत्र से
करवा दी साली की सगाई
इसलिए सच्चाई आज तक
सामने नहीं आई
कोई क्या के लेगा
इनका जब
हैं, चोर-चोर सभी मौसेरे भाई।
- गौरीशंकर मधुकर
सुकीर्ति प्रकाशन
इस शृंखला की अन्य रचनाएँ (Other articles in this series)
- दास्तान- ए- मोहब्बत
- हिन्दी-हत्या
- एक बैठे-ठाले की प्रार्थना
- ज़माना रिश्वत का
- फैशन | हास्य कविता
- नैराश्य गीत | हास्य कविता
- पैरोडी
- क्यों हमें डर लगता है
- आदमी से अच्छा हूँ ....!
- लोकतंत्र का ड्रामा देख
- लड्डू
- यमराज से मुलाक़ात
- यमराज का इस्तीफा
- रेलमपेल
- ये मत पूछो...
- जय जय जय अंग्रेजी रानी!
- पेट महिमा
- हास्य काव्य संकलन
- हास्य ही सहारा है
- कानून मिला हमको
- विचित्र विवशता!
- लंच! प्रपंच!!
- हुल्लड़ के दोहे
- मसख़रा मशहूर है... | हज़ल
- प्रयोगवाद
- नया ‘वाद’
- उन्हें आज ...
- ढोल, गंवार...
- विरह का गीत | हास्य काव्य
- बेधड़क दोहावली
- हँसाइयाँ
- शादी मत करना
- सोशल मीडिया
- कविता-कविता
- व्यथा एक जेब कतरे की
- फोटो
- मुझको सरकार बनाने दो
- दायरा | हास्य कविता
- खुशामद
- अच्छे दिन आने वाले हैं
- लेख की माँग
- सरल हैं; कठिन है | हास्य-व्यंग्य
- कैसी लाचारी | हास्य-व्यंग्य
- एप्रिल फूल | हास्य काव्य
- विरह का गीत
- अच्छा है पर कभी-कभी | हास्य
- क्या बताएं आपसे हम
- सत्य-असत्य में अंतर
- बेकाम कविता | हास्य कविता
- आप हँसते जाइए | हास्य-कविता