राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

Hindi Poems & Poetry - हिंदी कविता संकलन


Hindi Poems & Poetry - हिंदी कविता संकलन
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  1. ज़ख्म को भरने का दस्तूर होना चाहिए

    ज़ख्म को भरने का दस्तूर होना चाहिए/वसुधैव-कुटुंबकम् मशहूर होना चाहिए - ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र की ग़ज़ल।  Hindi Ghazal by Zafaruddin Zafar.

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  2. शेर होकर भी---

    शेर होकर भी भेड़िए के हवाले हुए हैं - ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र की ग़ज़ल। Ghazal by Zafaruddin Zafar.

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