बिना मातृभाषा की उन्नति के देश का गौरव कदापि वृद्धि को प्राप्त नहीं हो सकता। - गोविंद शास्त्री दुगवेकर।

देखो बापू | कविता

देखो बापू
कितनी हिंसा है
कितनी अराजकता है
कितनी लंबी टाँगें हैं
झूठ की
फरेब की काली चादर
ढक देती है
सत्य का प्रकाश

पर फिर भी
देखो बापू
सत्य डोलता है
इन रगों में
झूठ हार ही जाता है
देखो बापू
हार गए न दोनों
झूठा गुरु
और लुटेरा नेता

-पूनम शुक्ला


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