हिंदी के पुराने साहित्य का पुनरुद्धार प्रत्येक साहित्यिक का पुनीत कर्तव्य है। - पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल।
जन-गण-मन साकार करो
हे बापू, इस भारत के तुम,
एक मात्र ही नाथ रहे,
जीवन का सर्वस्व इसी को
देकर इसके साथ रहे।
तेरे कर्तव्यों से, बापू,
भारत चिर स्वाधीन हुआ,
उपकारों का ऋणी, सदा यह
तेरे ही आधीन हुआ।
कल्पों में भी कभी उऋण हो,
जन-गण-मन साकार करो,
आओ बापू, आओ फिर से
हम सबका उद्धार करो।
- छेदीसिंह