समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर
मुग़ल बादशाह की समाधि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस  - भारत-दर्शन संकलन  
   Author:  भारत-दर्शन संकलन

'गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की,
तख्त-ए- लंदन तक चलेगी तेग हिन्दुस्तान की।'

उपरोक्त शेर हिंदोस्तान के अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र ने कहा था।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी यह शेर पसंद था। वे अपने कुछ साथियों के साथ रंगून में भारत के इस अंतिम मुग़ल बादशाह की समाधि पर श्रद्धा प्रकट करने गये थे।

[भारत-दर्शन संकलन]

 

 
 

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