भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।

मोहनलाल महतो वियोगी

मोहनलाल महतो वियोगी का जन्म 1902 में हुआ था।

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आप दशकों तक अपनी प्रखर प्रतिभा से हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं को निष्ठापूर्वक समृद्ध करते रहे । आपने अनेक मौलिक एवं अविस्मरणीय उल्लेखनीय पुस्तकें लिखी हैं । वियोगी जी का काव्य राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत है । आपका गद्य-लेखन अत्यन्त विशाल और समृद्ध है ।  आप कहानीकार, उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार और संस्मरणकार थे ।  आप एक विचारक भी थे । आपकी गद्य-रचनाओं में सूक्तियों के असंख्य मोती हैं । आपकी सैकड़ों रचनाएँ दशकों से हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में असंकलित विखरी हुई हैं ।

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वियोगी जी के संपूर्ण साहित्य का मूल स्वर है-एक दुनिया एक सपना ।

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1990 में आपका निधन हो गया ।

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