देवनागरी ध्वनिशास्त्र की दृष्टि से अत्यंत वैज्ञानिक लिपि है। - रविशंकर शुक्ल।

संत पलटूदास

संत पलटू के जन्म के विषय में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं। अयोध्या के पास रामकोट में संत पलटू का समाधि स्थल है।

संत पलटू दास जाति के कांदू बनिया थे। आपका जन्म नगजलालपुर (जिला फैजाबाद),जो आजमगढ़ जिले की पश्चिमी सीमा के निकट है, हुआ था। मान्यता है कि आप संत भीखादास के शिष्य थे।

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गुरु महिमा

संत पलटूदास गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए कहते हैं:

आपै आपको जानते, आपै का सब खेल।
पलटू सतगुरु के बिना, ब्रह्म से होय न मेल॥

पलटू उधर को पलटिगे, उधर इधर भा एक।
सतगुरु से सुमिरन सिखै, फरक परै नहिं नेक॥

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