गजानन माधव मुक्तिबोध | Gajanan Madhav Muktibodh साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

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अँधेरे में

जिंदगी के...
कमरों में अँधेरे
लगाता है चक्कर

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मुक्तिबोध की कविता

मैं बना उन्माद री सखि, तू तरल अवसाद
प्रेम - पारावार पीड़ा, तू सुनहली याद
तैल तू तो दीप मै हूँ, सजग मेरे प्राण।

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मुक्तिबोध की कविताएं

यहाँ मुक्तिबोध के कुछ कवितांश प्रकाशित किए गए हैं। हमें विश्वास है पाठकों को रूचिकर व पठनीय लगेंगे।
ओ सूर्य, तुझ तक पहुँचने की
मूर्खता करना नहीं मैं चाह?...

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पक्षी और दीमक

बाहर चिलचिलाती हुई दोपहर है लेकिन इस कमरे में ठंडा मद्धिम उजाला है। यह उजाला इस बंद खिड़की की दरारों से आता है। यह एक चौड़ी मुँडेरवाली बड़ी खिड़की है, जिस...

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गजानन माधव मुक्तिबोध | Gajanan Madhav Muktibodh का जीवन परिचय