मुहब्बत की रियासत में सियासत जब उभर जाये प्रिये, तुम ही बताओ जिन्दगी कैसे सुधर जाये? चुनावों में चढ़े हैं वे, निगाहों में चढ़ी हो तुम
होली पर हास्य-कवि जैमिनी हरियाणवी की कविता होली के दिन ये क्या ठिठोली है छुट्टी अपनी तो आज हो ली है