पूजे पाहन पानी दादू दुनिया दीवानी, पूजे पाहन पानी।गढ़ मूरत मंदिर में थापी, निव निव करत सलामी।चन्दन फूल अछत सिव ऊपर बकरा भेट भवानी।छप्पन भोग लगे ठाकुर को ?...
इसक अलाह की जाति है, इसक अलाह का अंग। इसक अलाह औजूद है, इसक अलाह का रंग।। घीव दूध में रमि रह्या सबही ठौर।