हस्तिनापुर मैं गुरु द्रोणाचार्य के पास पांडुपुत्र और दुर्योधन आदि विद्या अध्ययन कर रहे थे, तब की बात है। एक दिन संध्याकालीन बेला में वे लोग शुद्ध वायु क?...
भारत देश नाम भयहारी, जन-जन इसको गाएँगे। सब शत्रुभाव मिट जाएँगे।। विचरण होगा हिमाच्छन्न शीतल प्रदेश में,
जय भारत, जय वंदे मातरम्॥ जय-जय भारत जय-जय भारत, जय-जय भारत, वंदे मातरम्। जय भारत, जय वंदे मातरम्।।
इसी देश में मातु-पिता जनमे पाए आनंद अपार, और हजारों बरसों तक पूर्वज भी जीते रहे-- अमित भाव फूले-फले जिनके चिंतन में यहीं।