सुब्रह्मण्य भारती | Subramania Bharati साहित्य Hindi Literature Collections

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अर्जुन का संदेह

हस्तिनापुर मैं गुरु द्रोणाचार्य के पास पांडुपुत्र और दुर्योधन आदि विद्या अध्ययन कर रहे थे, तब की बात है। एक दिन संध्याकालीन बेला में वे लोग शुद्ध वायु क?...

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सब शत्रुभाव मिट जाएँगे

भारत देश नाम भयहारी, जन-जन इसको गाएँगे।
सब शत्रुभाव मिट जाएँगे।।
विचरण होगा हिमाच्छन्न शीतल प्रदेश में,

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वंदे मातरम्‌

जय भारत, जय वंदे मातरम्‌॥
जय-जय भारत जय-जय भारत, जय-जय भारत, वंदे मातरम्‌।
जय भारत, जय वंदे मातरम्‌।।

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नमन करें इस देश को

इसी देश में मातु-पिता जनमे पाए आनंद अपार,
और हजारों बरसों तक पूर्वज भी जीते रहे--
अमित भाव फूले-फले जिनके चिंतन में यहीं।

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सुब्रह्मण्य भारती | Subramania Bharati का जीवन परिचय