मेरा भी तो मन करता है मैं भी पढ़ने जाऊँ अच्छे कपड़े पहन
छीनकर खिलौनो को बाँट दिये गम बचपन से दूर बहुत दूर हुए हम अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया
सो गई है मनुजता की संवेदना गीत के रूप में भैरवी गाइए गा न पाओ अगर जागरण के लिए
माँ कबीर की साखी जैसी तुलसी की चौपाई-सी माँ मीरा की पदावली-सी