दोस्तों के साथ बिताए लम्हों की याद दिलाते कई चित्र आज भी
हैवानियत तेरी भूखी थी इतनी एक ही दम में
नहीं आती हँसी अब हर बात पर लेकिन ये मत समझना कि मुझे कोई दर्द या ग़म है बस नहीं आती हँसी अब
शून्यता में झाँकती, पथराई आँखें, प्रश्नों को सुलझाने में लगी थीं । सन्नाटा इतना कि दिल को कचोट लेती। हल्की-सी गर्म हवा बह रही थी। ऐसे ही बीती थी वो शाम, घर क?...