दुकान पर सफेद गुड़ रखा था। दुर्लभ था। उसे देखकर बार-बार उसके मुँह से पानी आ जाता था। आते-जाते वह ललचाई नजरों से गुड़ की ओर देखता, फिर मन मसोसकर रह जाता। आखि?...
अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है; जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,
लीक पर वे चलें जिनके चरण दुर्बल और हारे हैं, हमें तो जो हमारी यात्रा से बने