कविता क्या है हाथ की तरफ उठा हुआ हाथ
जैसे चींटियाँ लौटती हैं बिलों में कठफोड़वा लौटता है
भाइयो और बहनो यह दिन डूब रहा है इस डूबते हुए दिन पर