विद्या, साहस, धैर्य, बल, पटुता और चरित्र। बुद्धिमान के ये छवौ, है स्वाभाविक मित्र ।। नारिकेल सम हैं सुजन, अंतर, दयानिधान ।
मैं ढूंढता तुझे था, जब कुंज और वन में। तू खोजता मुझे था, तब दीन के सदन में॥ तू 'आह' बन किसी की, मुझको पुकारता था।
मेरे मकान के पिछवाड़े एक झुरमुट में महोख नाम के पक्षी का एक जोड़ा रहता हैं । महोख की आँखें तेज़ रोशनी को नहीं सह सकतीं, इससे यह पक्षी ज्यादातर रात में और शा...
चित्रकार सुनसान जगह में बना रहा था चित्र। इतने ही में वहाँ आ गया यम राजा का मित्र॥ उसे देखकर चित्रकार के तुरंत उड़ गये होश।