संजय भारद्वाज साहित्य Hindi Literature Collections

कुल रचनाएँ: 5

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जीवन - संजय उवाच

भयमिश्रित एक चुटकुला सुनाता हूँ। अँधेरा हो चुका था। राह भटके किसी पथिक ने श्मशान की दीवार पर बैठे व्यक्ति से पूछा,' फलां गाँव के लिए रास्ता किस ओर से जाता ?...

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संजय भारद्वाज की दो कविताएं

जाता साल
(संवाद 2018 से)
करीब पचास साल पहले

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बीज

जलती सूखी जमीन
ठूँठ-से खड़े पेड़
अंतिम संस्कार की

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विडम्बना

ऐसा लबालब
क्यों भर दिया तूने,
बोलता हूँ तो

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सृष्टि का खिलना

प्रात: घूमने निकला। दो-चार दिन एक दिशा में जाने के बाद, नवीनता की दृष्टि से भिन्न दिशा में जाता हूँ। आज निकट के जॉगर्स पार्क के साथ की सड़क से निकला। पार्क ?...

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संजय भारद्वाज का जीवन परिचय