पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी साहित्य Hindi Literature Collections of Padumlal Punnalal Bakshi

कुल रचनाएँ: 5

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बुढ़िया

बुढ़िया चला रही थी चक्की
पूरे साठ वर्ष की पक्की।
दोने में थी रखी मिठाई

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झलमला

मैं बरामदे में टहल रहा था। इतने में मैंने देखा कि विमला दासी अपने आंचल के नीचे एक प्रदीप लेकर बड़ी भाभी के कमरे की ओर जा रही है। मैंने पूछा, 'क्यों री! यह क्य...

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उलहना

कहो तो यह कैसी है रीति?
तुम विश्वम्भर हो, ऐसी,
तो होतो नहीं प्रतीति॥

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कृतघ्नता

चन्द्र हरता है
निशा की कालिमा,
हृदय की देता

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गूँगी | कहानी

गूँगी का नाम था गोमती। पर वह खूब बोलती थी। इसलिए मैंने उसका नाम गूँगी रख दिया था। गूँगी बन जाने पर भी गोमती की वाक्-शक्ति कम नहीं हुई। तो भी सब लोग उसे गूँग?...

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पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय