यदि पक्षपात की दृष्टि से न देखा जाये तो उर्दू भी हिंदी का ही एक रूप है। - शिवनंदन सहाय।
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रमेश पोखरियाल 'निशंक' की क्षणिकाएँ - डॉ रमेश पोखरियाल निशंक

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