उत्तर प्रदेश के प्रति | कविता

रचनाकार: मैथिलीशरण गुप्त | Mathilishran Gupt

उत्तर दे, हे उत्तर प्रदेश!
संत प्रश्न लेकर आए हैं सहकर कितना काय-क्लेश।

कैसे भूमि-समस्या सुलझे,
नए जाल में देश न उलझे,

इसके समाधान करने में रक्षित रख निज रूप-वेश।
उत्तर दे, हे उत्तर प्रदेश!

राम-कृष्ण की पुण्य भूमि तू,
भूल न, निस्त्रैगुण्य भूमि तू,

तेरा प्रहरी हर-गौरी का धवल हिमालय भूधरेश।
उत्तर दे, हे उत्तर प्रदेश!

तू स्वभाग से संत पात्र भर,
अधिक न कर, कर्त्तव्य मात्र कर,

ले उनका आशीष, कृष्ण हों पुनरपि तेरे शुभ्र केश!
उत्तर दे, हे उत्तर प्रदेश!

जो जन नहीं शक्ति भर देता,
अपनी ही चोरी कर लेता,

हरी-भरी खेती भी खूसे करे जलद यदि लोभ-लेश।
उत्तर दे, हे उत्तर प्रदेश!

- मैथिलीशरण गुप्त