हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस: क्या है अंतर?

रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी'

हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस

हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस दो अलग-अलग आयोजन हैं। यद्यपि दोनों का उद्देश्य हिंदी का प्रचार-प्रसार है, किंतु इनका इतिहास और पृष्ठभूमि पूर्णतः पृथक है। आइए, इनके बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

1. हिंदी दिवस (14 सितंबर) भारत में हर वर्ष 14 सितंबर को 'हिंदी-दिवस' मनाया जाता है।

इतिहास और पृष्ठभूमि: 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। इस निर्णय का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 343 में किया गया है।

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हर वर्ष हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी को यह दर्जा दिलाना आसान नहीं था। इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी गई, जिसमें ब्यौहार राजेंद्र सिंहा ने अहम भूमिका निभाई थी। यह एक सुखद संयोग ही था कि 14 सितंबर, 1949 को जब हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला, उस दिन ब्यौहार राजेंद्र सिंहा का 50वां जन्मदिन भी था।

2. विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी) :  विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए वातावरण निर्मित करना, हिंदी के प्रति अनुराग पैदा करना और इसे एक विश्व भाषा के रूप में स्थापित करना है।

इस दिन विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास और सभी सरकारी कार्यालय विभिन्न विषयों पर हिंदी के अनूठे कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

10 जनवरी ही क्यों? विश्व में हिंदी को प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से 'विश्व हिंदी सम्मेलन' की शुरुआत की गई थी। प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था, जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था।

इसी उपलक्ष्य में, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष 'विश्व हिंदी दिवस' मनाए जाने की घोषणा की थी। तब से यह निरंतर मनाया जा रहा है।