भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

मेजबान

 (कथा-कहानी) 
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रचनाकार:

 खलील जिब्रान

'कभी हमारे घर को भी पवित्र करो।' करूणा से भीगे स्वर में भेड़िये ने भोली-भाली भेड़ से कहा।

'मैं जरूर आती बशर्ते तुम्हारे घर का मतलब तुम्हारा पेट न होता।' भेड़ ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया।

खलील जिब्रान

 

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