हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

कुछ झूठ बोलना सीखो कविता!

 (काव्य) 
Print this  
रचनाकार:

 जयप्रकाश मानस | Jaiprakash Manas

कविते!
कुछ फरेब करना सिखाओ कुछ चुप रहना
वरना तुम्हारे कदमों पर चलनेवाला कवि मार दिया जाएगा खामखां
महत्वपूर्ण यह भी नहीं कि तुम उसे जीवन देती हो

अमरत्व भी
पर मरने के बाद

कविता फिलहाल उसे
तुम जरा-सा झूठ दे दो
ताकि किसी तरह वह बच जाए

जब बचा ही नहीं रहेगा कवि
तो कविता के साथ कौन आना पसंद करेगा!

- जयप्रकाश मानस

[साभार - अबोले के विरुद्ध]

 

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश