देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

भारत-दर्शन संकलन

प्राचीनकाल के राजदरबारों में सब प्रकार के गुणियों का सम्मान किया जाता था। बादशाह अकबर के दरबार में बीरबल अपनी विनोदप्रियता व कुशाग्रबुद्धि के लिए जाने जाते थे। अकबरी राजसभा के नौरत्नों में बीरबल कोहेनूर हीरा कहे जा सकते हैं।

बीरबल व अकबर का लड़कपन से साथ था। बीरबल केवल एक हँसोड़े मात्र न होकर अच्छे शूरवीर, सामन्त, कवि, पंडित और सभाचातुर नरवीर थे। बीरबल बड़े दयालु व दानवीर होने के साथ-साथ बहुत हाजिरजवाब थे।

यहाँ अकबर-बीरबल के रोचक किस्सों को संकलित किया गया है।

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