समस्त आर्यावर्त या ठेठ हिंदुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिंदी या हिंदुस्तानी है। -सर जार्ज ग्रियर्सन।

डॉ. रामनिवास मानव के दोहे

 (काव्य) 
Print this  
रचनाकार:

 डॉ रामनिवास मानव | Dr Ramniwas Manav

डॉ. 'मानव' दोहा, बालकाव्य तथा लघुकथा विधाओं के सुपरिचित राष्ट्रीय हस्ताक्षर हैं तथा विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। उनके कुछ दोहे यहां दिए जा रहे हैं:

1
ये पत्थर की मूर्तियां, ये पाहन के देव।
इनकी पूजा-अर्चना, मुझको लगे कुटेव।।

2
गगन-विहारी देवता, ब्रह्मा-विष्णु-महेश।
मिलकर कुछ ऐसा करें, विश्व का मिटे क्लेश।।

3

अब तक जब मांगा नहीं, कभी किसी से दान।
फिर तुमसे मां शारदे, मांगूं क्यों अवदान।।

4
देना हो तो दो मुझे, बस इतना वरदान।
शब्द-शब्द समिधा बने, अर्थ-अर्थ यजमान।।

5

अग्निधर्मा अर्थ हो, शक्तिधर्मा शब्द।
अपने हाथों से लिखूं, कविता का प्रारब्ध।।

6
इतनी विनती और है, देना यह आशीष।
कभी याचना के लिये, झुके न मेरा शीश।।

-डॉ. रामनिवास मानव

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश