हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

दो विद्वान

 (कथा-कहानी) 
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रचनाकार:

 खलील जिब्रान

एक बार एक प्राचीन नगर में दो विद्वान रहते थे। दोनों बड़े विद्वान थे लेकिन दोनों के बीच बड़ा मनमुटाव था। वे एक-दूसरे के ज्ञान को कमतर आँकने में लगे रहते।  

उनमें से एक नास्तिक और दूसरा आस्तिक था।

एक दिन दोनों बाजार में मिले। दोनों अपने अनुयायियों के साथ थे और वे सब ईश्वर के अस्तित्व को लेकर एक वाद-विवाद में उलझ गए। घंटों मशक्कत के बाद दोनों अलग हो गए।

उसी शाम नास्तिक मंदिर गया और वेदी के सामने नतमस्तक होकर प्रार्थना करने लगा कि ईश्वर उसके हठीले अतीत के लिए उसे क्षमा करे।

और उसी घड़ी आस्तिक विद्वान ने,  अपनी पवित्र पुस्तकों को जला दिया।  उसकी आस्था डगमगा चुकी थी।

-ख़लील जिब्रान 
भावानुवाद : रोहित कुमार 'हैप्पी'
[ The Two Learned Men] 

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भारत-दर्शन रोजाना

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