समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

चिड़िया

 (बाल-साहित्य ) 
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रचनाकार:

 त्रिलोक सिंह ठकुरेला

घर में आती जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

तिनके लेकर नीड़ बनाती ,
अपना घर परिवार सजाती ,
दाने चुन चुन लाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।। 

सुबह सुबह जल्दी जग जाती ,
मीठे स्वर में गाना गाती ,
हर दिन सुख बरसाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

कभी नहीं वह आलस करती ,
मेहनत  से वह कभी न डरती ,
रोज काम पर जाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।। 

हँसना , गाना  कभी न  भूलो ,
साहस हो तो नभ को छूलो ,
सबको यह सिखलाती चिड़िया ।
सबके मन को भाती चिड़िया ।।

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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