वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

ऐसा वर दो 

 (बाल-साहित्य ) 
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रचनाकार:

 त्रिलोक सिंह ठकुरेला

भगवन् हमको ऐसा वर दो।
जग के सारे सद्गुण भर दो॥

हम फूलों जैसे मुस्कायें,
सब पर प्रेम ­ सुगंध लुटायें,
हम पर­हित कर खुशी मनायें,
ऐसे भाव हृदय में भर दो।
भगवन् हमको ऐसा वर दो॥

दीपक बनें, लड़े हम तम से,
ज्योर्तिमय हो यह जग हम से,
कभी न हम घबरायें गम से,
तन मन सबल हमारे कर दो।
भगवन्, हमको ऐसा वर दो॥

सत्य मार्ग पर बढ़ते जायें,
सबको हीं सन्मार्ग दिखायें,
सब मिलकर जीवन ­फल पायें,
ऐसे ज्ञान, बुद्धि से भर दो।
भगवन, हमको ऐसा वर दो॥

 - त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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