अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

ज़िंदगी तुझे सलाम

ज़िंदगी तुझे सलाम | Hindi poem by Dr Pushpa Bhardwaj-Wood

सोचा था अभी तो बहुत कुछ करना बाक़ी है
अभी तो घर भी नहीं बसाया
ना ही अभी किसी को अपना बनाया।

अभी तो किसी को यह भी नहीं बताया कि हमें भी किसी की तलाश है
ना ही अभी दूसरों को अपनाने की कला सीखी।

अभी तो अपने किए पर पछतावा करना आया नहीं
ना ही अभी अपनी ग़लतियों को सुधारने की अदा सीखी।

अब तक तो सिर्फ़ हमने अपनी ही उपलब्धियों पर जश्न मनाया है
किसी को अपने से भी आगे बढ़ते देख कर ख़ुशियाँ मनाने का जोश नहीं आया।

अभी तो बहुत कुछ करना बाक़ी है ज़िंदगी
मौत के बुलावे पर ध्यान देने का मौक़ा आया ही नहीं।

--डा॰ पुष्पा भारद्वाज-वुड

 

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