हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर (काव्य)    Print this  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

फैला है अंधकार हमारी धरती पर
हर जन है लाचार हमारी धरती पर
हे देव! धरा है पूछ रही...
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

तुम तो कहते थे धर्म की हानि होगी जब-जब
हर लोगे तुम पाप धरा के आओगे तुम तब-तब
जरा सुनों कि त्राहि-त्राहि चारों ओर से होती है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

सीता झेल रही संताप
रोके रुके नहीं है पाप
हानि धर्म की होती है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

द्रोपदी कलयुग में लाचार
तुम्हें क्यों सुनती नहीं पुकार
दुर्योधन मुँह बिचकाता है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

दुर्योधन लाख सिरों वाला
टलता नहीं टले टाला
दुर्योधन हमें चिढ़ाता है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

यहाँ रावण राज लगा चलने
मिलकर विभीषण-रावण से
श्रीराम को रोज सताता है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

अब आ जाओ हरि जल्दी से
प्रभु देर ना करना गलती से
जग आँख लगाए बैठा है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

यहां रंग नहीं हैं होली के
नित खून बहे है गोली से
मन व्याकुल तुम्हें ध्याता है
कब लोगे अवतार हमारी धरती पर !

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

Previous Page  |   Next Page
 
Post Comment
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश