यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।
सत्ता का नया फार्मुला  (विविध)    Print this  
Author:डॉ सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त

एक समय था जब सरकार जनता से बनती थी। चुनाव की गर्मी के समय एयर कंडीशनर और बारिश की फुहार जैसे वायदे करने वाले जब सरकार में आते हैं, तब इनके वायदों को न जाने कौन सा लकवा मार जाता है कि कुछ भी याद नहीं रहता। अब तो जनता को बेवकूफ बनाने का एक नया फार्मूला चलन में आ गया है। चुनाव के समय S+R=JP का फार्मूला धड़ल्ले से काम करता है। यहां S का मूल्य शराब और R का मूल्य रुपया और JP का मतलब जीत पक्की। यानी शराब और रुपए का संतुलित मिश्रण गधे तक के सिर ताज पहना सकता है। यदि चुनाव जीत चुके हैं और पाँच साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है, तब जीत का फार्मूला बदल जाता है। वह फार्मूला है PPP । यहां पहले P का मतलब पेंशन। पेंशन यानी बेरोजगारी पेंशन, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, किसान पेंशन, आदि-आदि। दूसरे P का अर्थ है पैकेज। इस पैकेज के लाखों-करोड़ों रुपए पैकेज की घोषणा कर दे फिर देखिए जनता तो क्या उनका बाप भी वोट दे देगा। वैसे भी जनता को लाखों-करोड़ों में से कुछ मिले न मिले शून्य की भरमार जरूर मिलेगी। इसी फार्मूले के तीसरे P का अर्थ है पगलाहट। जनता को मनगढ़ंत और उटपटांग उल्टे-सीधे सभी वायदे कर दें, फिर देखिए जनता में जबरदस्त पगलाहट देखने को मिलेगी।

इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद कुछ बुद्धिजीवी किस्म की जो जनता होती है, वो मनलुभावने वायदों में नहीं पड़ती। इन्हें पटाना सबसे टेढ़ी खीर है। ऐसों के लिए गांव-गांव और शहर-शहर में अलमारी नुमा होर्डिंग लगा दें। ऊपर लिख दें - क्या आप अपनी समस्याओं से परेशान हैं? नौकरी की जरूरत है? क्या आपको पेंशन की जरूरत है? क्या आपको खेती, स्वास्थ्य, उद्योग संबंधित समस्याएं हैं? तो इसके लिए इस अलमारीनुमा होर्ड़िंग को खोलिए और मिलिए उस व्यक्ति से जो आपकी समस्याओं का हल निकाल सकता है। जनता के पास समाधान कम समस्याएं अधिक होती है। हर कोई इसे आजमाने के चक्कर में हार्डिंग खोलने लगा। होर्ड़िंग में उनकी समस्याओं का समाधान करने वाले का चेहरा देखकर सब के सब दंग रह गए। माथा पीटते और अपनी किस्मत को कोसते हुए वहाँ से चले गए। वैसे क्या आप बता सकते हैं कि उस होर्डिंग में किसकी तस्वीर थी? नहीं न? उसमें किसी की तस्वीर नहीं बल्कि दर्पण लगा हुआ था। वो क्या है न कि जनता समाज का दर्पण होती है।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’
ई-मेल : drskm786@gmail.com

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