समस्त आर्यावर्त या ठेठ हिंदुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिंदी या हिंदुस्तानी है। -सर जार्ज ग्रियर्सन।
प्रोफेसर ब्रिज लाल (विविध)    Print this  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी' | न्यूज़ीलैंड

प्रोफेसर ब्रिज लाल प्रसिद्ध इंडो-फीजियन इतिहासकार थे। आप लंबे समय से निर्वासन में थे और वर्तमान में ब्रिस्बेन, ऑस्ट्रेलिया के निवासी थे।

प्रोफेसर ब्रिज लाल का जन्म 21 अगस्त 1952 लम्बासा, फीजी में हुआ था। कई स्थानों पर इनका नाम  'बृज लाल' भी लिखा हुआ है लेकिन इन्होंने स्वयं अपना नाम 'ब्रिज लाल' ही लिखा है।  विदेश में पैदा हुए बहुत से भारतवंशियों के नामों में भ्रम की स्थिति रहती है।

प्रोफेसर ब्रिज लाल के दादा जी एक गिरमिटिया श्रमिक के रूप में भारत के उत्तर प्रदेश से फीजी आए थे।  1970 के आसपास वे एक वर्ष के लिए, अपने शोध हेतु भारत में रहे। उनका शोध अनुबंधित भारतीय श्रमिकों की पृष्ठभूमि पर था। अपने भारत प्रवास के दौरान वे लगभग 6 महीने उत्तरपूर्व भारत के ग्रामीण क्षेत्र में भी रहे, जहां से अनुबंधित श्रमिक विदेशों में गए थे। वे लिखते हैं, "मैंने धुएँ भरे ढाबों में चिकनाईयुक्त भोजन किया, मिट्टी के कुल्हड़ों में चाय पी, खटमल वाले बिस्तरों पर सोया, जर्जर बसों में यात्रा की और अपनी टूटी-फूटी हिंदी में संवाद किए।" उन्होंने अपने शोध के लिए भारत के अतिरिक्त त्रिनिदाद, गुआयना, सूरीनाम, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका की भी यात्रा की।

प्रोफेसर लाल इंडो-फीजियन का प्रतिनिधित्व करने वाली सशक्त आवाज थे। राजनीतिक तख्तापलट के दौरान उनके लेखन को लेकर सत्तारूढ़ सरकार उनसे अप्रसन्न रही।

नस्लवादी नीतियों की आलोचना के लिए, उन्हें 2009 में उनकी जन्म भूमि 'फीजी' से निर्वासित कर दिया गया। फीजी में लोकतंत्र की बहाली और संविधान निर्माण की प्रक्रिया में  उनकी भागीदार रही है। प्रोफेसर ब्रिज लाल और उनकी पत्नी को फीजी की आंतरिक सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए, फीजी की सरकार ने उनके फीजी आवागमन पर प्रतिबंध लगा रखा था।

ब्रिज लाल प्रशांत के इतिहास के विद्वान थे। वे मानवाधिकारों के पक्षधर थे। निर्वासित होने के बावजूद, वे अपने सिद्धांतों पर अटल रहे और किसी प्रकार का समझोता नहीं किया।

लेखन
ब्रिज लाल का समूचा लेखन फीजी के औपनिवेशिक इतिहास, राजनीति, गिरमिटिया श्रमिकों के जीवन, उनके संघर्ष और अंतर्द्वंद्वों को उल्लेखित करता रहा है। उन्होंने दुनिया भर में भारतीयों के प्रवास पर एक विस्तृत श्रृंखला, 'भारतीय डायस्पोरा के विश्वकोश' का संपादन किया।

गिरमिटिया : द ऑरिजन ऑफ द फीजी इंडियंस, मिस्टर तुलसीज स्टोर : ए फीजियन जर्नी, चलो जहाज़ी :ऑन ए जर्नी थ्रू इंडेंचर इन फीजी, बिटर-स्वीट : द इंडो-फीजियन एक्सपीरियंस उनकी चर्चित पुस्तकें हैं। प्रोफेसर लाल  द्वारा संपादित निबंधों की नवीनतम पुस्तक पिछले महीने ही जारी हुई थी।

निधन
25 दिसंबर 2021को ब्रिसबेन, ऑस्ट्रेलिया में आपका निधन हो गया।

-रोहित कुमार हैप्पी

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