हिंदी के दिलदार सिपाही के अतर्गत हम ऐसे हिंदी सेवियों की जानकारी संकलित कर रहे हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से हिंदी की सेवा की। इनमें अनेक विदेशी भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने हिंदी से अटूट स्नेह किया। आज हिंदी इनपर गर्व करती है।
राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)