मुस्लिम शासन में हिंदी फारसी के साथ-साथ चलती रही पर कंपनी सरकार ने एक ओर फारसी पर हाथ साफ किया तो दूसरी ओर हिंदी पर। - चंद्रबली पांडेय।
जीवन का अधिकार (काव्य)    Print this  
Author:सुमित्रानंदन पंत | Sumitranandan Pant

जो है समर्थ, जो शक्तिमान,
जीवन का है अधिकार उसे।
उसकी लाठी का बैल विश्‍व,
पूजता सभ्‍य-संसार उसे!

दुर्बल का घातक दैव स्‍वयं,
समझो बस भू का भार उसे।
'जैसे को तैसा'-- नियम यही,
होना ही है संहार उसे।

है दास परिस्थितियों का नर,
रहना है उसके अनुसार उसे।
जीता है योग्‍य सदा जग में ,
दुर्बल ही है आहार उसे।

तृण, झष पशु से नर-तन देता,
जीवन विकास का तार उसे।
वह शासन क्‍यों न करे भू पर,
चुनना है सब का सार उसे।

-सुमित्रानंदन पंत

 

Previous Page  |   Next Page
 
Post Comment
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश