वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

सत्येन्द्रनाथ ठाकुर : पहले भारतीय आईसीएस अधिकारी  (विविध)

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Author: भारत-दर्शन संकलन

सत्येन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) भारतीय सिविल सेवा में शामिल होने वाले पहले भारतीय थे। सत्येन्द्रनाथ ठाकुर का जन्म 1 जून 1842 को कलकत्ता में हुआ था।

इंडियन सिविल सर्विस (आईसीएस), जिसे आधिकारिक तौर पर इंपीरियल सिविल सर्विस के रूप में जाना जाता है, 1858 और 1947 के बीच ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की उच्च सिविल सेवा थी। 1861 से पहले, सभी अनुबंधित पदों पर केवल ब्रिटिश अधिकारियों को ही नियुक्त किया जाता था। 1861 के आईसीएस अधिनियम ने भारतीय सिविल सेवा की स्थापना की। लेकिन, भारतीयों के लिए इंग्लैंड जाकर किसी पद के लिए अंग्रेजों से प्रतिस्पर्धा करना आसान काम नहीं था।1947 में भारतीय सिविल सेवा (ICS) को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के रूप में परिवर्तित किया गया और इसी समय इंडियन पुलिस (IP) को इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। इन सेवाओं को संविधान द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं के रूप में मान्यता प्रदान की गई। 

सत्येंद्रनाथ ठाकुर गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) के बड़े भाई थे और स्वयं भी लेखक, कवि और साहित्यकार थे।

सत्येन्द्रनाथ ठाकुर सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने और उनमें प्रतिस्पर्धा करने के लिए 1862 में इंग्लैंड गए। सत्येन्द्रनाथ ठाकुर जब 1862 और 1864 के बीच अपनी आईसीएस परीक्षा और प्रशिक्षण के लिए इंग्लैंड में थे, तब उनकी उम्र 20 वर्ष थी। जून, 1863 में सत्येन्द्रनाथ को भारतीय सिविल सेवा के लिए चुना गया। उन्होंने अपना प्रशिक्षण पूरा किया और नवंबर 1864 में भारत लौट आए। उनकी पहली पोस्टिंग बॉम्बे प्रेसीडेंसी में थी।

अपनी सेवा के दौरान, सत्येन्द्रनाथ ठाकुर ने पूरे देश की यात्रा की। बंगाल के बाहर उनकी पोस्टिंग से उन्हें कई भारतीय भाषाएँ सीखने में मदद मिली। सत्येन्द्रनाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज और प्रार्थना समाज की गतिविधियों में गहरी रुचि ली। वे 1897 में आईसीएस से सेवानिवृत्त हुए। 9 जनवरी 1923 को  सत्येन्द्रनाथ ठाकुर का निधन हो गया।

[भारत-दर्शन]

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