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पुस्तक समीक्षा : सिंगापुर में भारत (विविध)

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Author: रोहित कुमार हैप्पी

सिंगापुर में भारत

पुस्तक का शीर्षक - सिंगापुर में भारत (विशेष संदर्भ उत्तर भारत)
लेखिका - डॉ संध्या सिंह
प्रकाशक - केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, भारत

‘सिंगापुर में भारत’ पुस्तक की लेखिका डॉ संध्या सिंह नेशनल यूनिवर्सिटी ऑव सिंगापुर में हिंदी और तमिल भाषा विभाग प्रमुख हैं। वाराणसी में जन्मी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षित डॉ सिंह ढाई दशकों से भी अधिक समय से सिंगापुर की निवासी हैं और सिंगापुर में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक हिन्दी जगत में एक परिचित नाम हैं।  

‘सिंगापुर में भारत’ पुस्तक सिंगापुर में रहने वाले भारतीय समुदाय के इतिहास, संस्कृति और अनुभवों का एक व्यापक चित्रण प्रस्तुत करती है। लेखिका डॉ संध्या सिंह विभिन्न पीढ़ियों के भारतीय प्रवासियों के जीवन पर प्रकाश डालती हैं, और वे अपनी मातृभूमि से दूर रहते हुए अपनी पहचान और संस्कृति को कैसे बनाए रखते हैं, इसकी पड़ताल करती हैं। यह पुस्तक लेखिका के व्यक्तिगत अनुभवों और शोध पर आधारित है।

पुस्तक को दस श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है जिनमें 'सिंगापुर : एक परिचय', 'भारतीयों का आगमन', 'हिंदी और हिंदुस्तानी भाषा की उपस्थिति', 'हिंदी शिक्षण की आवश्यकता व स्थिति', 'स्वयंसेवी संस्थाएँ एवं मंदिर', 'साहित्य और हिंदी भाषा संबंधी कार्य', 'प्रसारण सेवाएँ', 'भारतीय नामों वाले महत्वपूर्ण रास्तों की कहानी', 'उल्लेखनीय व्यक्ति' एवं 'सिंगापुर : कुछ रोचक तथ्य' सम्मिलित हैं। ‘यथा नाम तथा गुण’ की उक्ति चरितार्थ करते हुए इस पुस्तक की श्रेणियों के शीर्षक ही उसकी सामग्री के परिचायक हैं।

इस पुस्तक में सिंगापुर में बसे भारतीय समुदाय की जीवनशैली, सांस्कृतिक धाराएँ, सामाजिक संगठन, और उनकी ऐतिहासिक महत्वपूर्ण घटनाओं को भी उजागर किया गया है। लेखिका ने विस्तृत अनुसंधान और व्यापक शोध के माध्यम से पुस्तक को अत्यंत पठनीय बना दिया है, जिससे सिंगापुर के प्रति पाठकों की समझ और विकसित होगी।

पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं:

समृद्ध जानकारी: यह पुस्तक सिंगापुर में भारतीय समुदाय के बारे में जानने के लिए एक मूल्यवान स्रोत है।

विस्तृत शोध: पुस्तक में सिंगापुर में भारतीय समुदाय के इतिहास और विकास के बारे में गहन जानकारी है। लेखिका ने प्राथमिक स्रोतों, साक्षात्कारों और विद्वानों के कार्यों का उपयोग करके डेटा एकत्रित किया है।

उल्लेखनीय प्रवासी परिचय: पुस्तक में विभिन्न उल्लेखनीय प्रवासियों का परिचय है, जो पाठकों को उनके संघर्षों, सपनों और सिंगापुर में जीवन की वास्तविकताओं से जुड़ने में सहायक है।

सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि: लेखिका भारतीय द्वारा अपनी संस्कृति और परंपराओं को कैसे सिंगापुरी समाज के अनुरूप अनुकूलित किया, इसकी जानकारी देती हैं।

विश्लेषणात्मक ढांचा: पुस्तक में प्रवास, पहचान, संस्कृति और सामाजिक परिवर्तन जैसे जटिल विषयों का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है।
समृद्ध जानकारी: यह पुस्तक सिंगापुर में भारतीय समुदाय विशेषतः उत्तर भारतीयों व सिंगापुर में हिन्दी के परिदृश्य के बारे में जानने के लिए एक अहम् स्रोत प्रमाणित होगी।

व्यापक विषय व विभिन्न दृष्टिकोण: पुस्तक विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के भारतीय प्रवासियों के अनुभवों को प्रस्तुत करती है।
समकालीन प्रासंगिकता: यह पुस्तक सिंगापुर में प्रवास, बहु-संस्कृति और वैश्वीकरण जैसे समकालीन मुद्दों पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।

आप सिंगापुर में पर्यटन के लिए जा रहे हो, शॉपिंग के लिए जा रहे हों, वहाँ की संस्कृति के बारे में जाने के इच्छुक हों, नेताजी सुभाष और सिंगापुर के सम्बन्धों के बारे में जानकारी चाहते हो, शोध कर रहे हों, अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाना चाहते हो, सिंगापुर की दिलचस्प जानकारी के जिज्ञासु हों या वहाँ के हिन्दी समुदाय से परिचित होना चाहते हों—यह पुस्तक आपके लिए है।

कुल मिलाकर यूं कहा जा सकता है कि "सिंगापुर में भारत" सिंगापुर में भारतीय समुदाय के इतिहास, संस्कृति और अनुभवों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। यह पुस्तक विद्वानों, पत्रकारों, पर्यटकों, छात्रों और सामान्य पाठकों सभी के लिए रुचिकर है जो प्रवास, बहु-संस्कृति और वैश्वीकरण के मुद्दों में रुचि रखते हैं अथवा समकालीन दुनिया में भारतीय डायस्पोरा के बारे में पढ़ना चाहते हैं

इस पुस्तक में सिंगापुर के इतिहास, सांस्कृतिक प्रभाव, भूगोल, समाजशास्त्र, राजनीति, और भाषा-साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों का उल्लेख भी है। पुस्तक में सिंगापुर के विकास और संस्कृति के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की गई है।

मैं स्वयं अनेक बार सिंगापुर गया हूँ लेकिन निःसन्देह इस पुस्तक ने मेरे ज्ञान में वृद्धि की है। इससे सिंगापुर के बारे में अनेक नई जानकारियाँ हासिल हुई हैं। इस पुस्तक में सिंगापुर की अँग्रेजी के उल्लेख ने मुझे ‘सिंग्लिश’ के बारे में और अधिक जानने को प्रेरित किया।

यदि आप सिंगापुर में भारतीय समुदाय के बारे में विस्तृत जानकारी की आकांक्षा रखते हैं और इसके लिए किसी पुस्तक की तलाश में हैं, तो "सिंगापुर में भारत" पढ़ने लायक है।

           समीक्षक : रोहित कुमार हैप्पी
           संपादक : भारत-दर्शन ऑनलाइन पत्रिका, न्यूज़ीलैंड 
           ई-मेल : editor@bharatdarshan.co.nz

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