हिंदी भाषा को भारतीय जनता तथा संपूर्ण मानवता के लिये बहुत बड़ा उत्तरदायित्व सँभालना है। - सुनीतिकुमार चाटुर्ज्या।
इन्सान (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:अजना अनिल

एक दिन वो नगर के कई लोगों से मिला।

सबने अपने-अपने नाम बताकर परिचय दिया ।

लेकिन उसे बेहद कोफ़्त हुई ।

'कि काश! कोई तो कह देता यार!'

- मैं क्या हूँ? कौन हूँ? क्यों पूछते हो?
हूँ तो सिर्फ इन्सान ही!

- अजना अनिल [साक्षात्कार]

 

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