राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार
बदला हुआ मौसम  (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

अचानक हिंदी पर गोष्ठियां, सम्मेलन व तरह-तरह के समारोह आयोजित होने लगे थे।  हिंदी नारे बुलंदियो पर थे। सरकारी संगठनो से साठ-गांठ के ताबड़तोड़ प्रयास भी जोरों पर थे।

इन दिनों 'अंग्रेज़ी' भी 'हिंदी' बोलने लगी थी। मौसम बदला-बदला महसूस हो रहा था। कुछ बरसों में ऐसा मौसम तब आता है जब 'विश्व हिंदी' सम्मेलन आने वाला होता है।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

Previous Page  |  Index Page  |   Next Page
 
 
Post Comment
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें


Deprecated: Directive 'allow_url_include' is deprecated in Unknown on line 0