राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार
परम्परा (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

महाविद्यालय का एक अध्ययन-कक्ष।

महाविद्यालय में नई लगी 29-30 वर्षीय एक प्रवक्ता अपना वक्तव्य दे रही है। कक्षा में कुछ लड़के लैक्चरर को देखते हुए, एक-दूसरे को देख भद्दे से संकेत करते हुए मुसकराते हैं।

'गुरु-शिष्य' की पवित्र 'प्राचीन परम्परा' कलयुगी शिष्यों से आहत हो सुबक उठती है।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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