यदि हम अंग्रेजी दूसरी भाषा के समान पढ़ें तो हमारे ज्ञान की अधिक वृद्धि हो सकती है। - जगन्नाथप्रसाद चतुर्वेदी।
खुद ही बनाया और बिगाड़ा तकदीरों को
खुद ही बनाया और बिगाड़ा तकदीरों को
मैं मानता नहीं हाथ की लकीरों को।
महलों में रहें या कभी हों बेघर
फर्क पडता है कब फकीरों को।
कर्म अपने का फल मियाँ भोगो
कोसते क्यों हो भला तकदीरों को।
दुख गरीबों को ही बस नहीं होते
खुशियाँ मिलती नहीं सब अमीरों को।
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