हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना
इमतियाज गदर की दो लघुकथाएं  (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:इमतियाज गदर

अनेकता का फल

शिकारी, कबूतरों की एकता की ताकत को भांप चुका था। इस बार वह अपना जाल और शिकार दोनों नहीं खोना चाहता था इसलिए उसने इस बार कई जाल बनाए और उन्हें विभिन्न स्थानों में लगा दिया। साथ ही प्रत्येक जाल में अलग-अलग प्रकार के चारे का प्रयोग किया।

अब, जब ढेर सारे कबूतर एक साथ दाना चुगने के लिए आए, तब उन्हें पास-पास ही विभिन्न प्रकार के चारे दिखाए दिए। उन चारों को एक साथ या फिर अलग-अलग चुनने को लेकर कबूतरों में आपस में मतभेद हो गया। फिर कबूतर दो-चार की संख्या में बटकर अलग-अलग स्थानों पर चारा चुनने लग गए और देखते-देखते सभी जाल में फंसते चले गए। अब चूंकि एक जाल में दो-चार ही कबूतर थे, इसलिए वो पहले की तरह शिकारी के आने से पहले जाल को लेकर न उड़ सके।

शिकारी के चंगुल में फंस कर सभी कबूतर अपनी भूल का एहसास कर रहे थे, लेकिन अब देर हो चुकी थी।

-इमतियाज गदर

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मोक्ष


महात्मा जी जब प्रवचन देकर मंच से उतरे, तब लोग उनका आशीर्वाद लेने के लिए उनकी ओर उमड़ पड़े। किसी न हाथ जोड़ कर प्रणाम किया, तो किसी ने शीष नवा कर नमन किया। एक बुजुर्ग श्रद्धालु ने श्रद्धा से वशीभूत होकर उनके चरणों में अपना सर रख दिया। महात्मा जी ने अपने पावों को उलझते देख कर उस बुजुर्ग श्रद्धालु को एक ठोकर दी और आगे बढ गए। बुजुर्ग श्रद्धालु भीड़ में कुचलता चला गया।

भीड़ जब छंटी, तब कुछ दयालु लागों ने उसे गम्भीर अवस्था में देख कर अस्पताल ले जाने लगे। अस्पताल पहुंचने से पहले उस बुजुर्ग श्रद्धालु के होंठ हिले-‘‘महात्मा जी ने मुझे धन्य कर  दिए....अब मुझे मोक्ष की प्राप्ति होगी।‘‘ और अगले क्षण उस बुजुर्ग श्रद्धालु के प्राण-पखेरू उड़ गए।

दूसरे दिन मीडिया वालों ने महात्मा जी की उस हरकत की खूब आलोचना की।

- इमतियाज गदर

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