क्या आप जानते हैं महीनों के नामों का इतिहास?

रचनाकार: भारत-दर्शन संकलन

क्या आप जानते हैं महीनों के नामों का इतिहास?

हम सभी जनवरी से लेकर दिसंबर तक के महीनों के नामों से परिचित हैं, जिनका उपयोग आज पूरी दुनिया में (ग्रेगोरियन कैलेंडर के रूप में) होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन महीनों का नामकरण कैसे हुआ? इनके पीछे रोम के देवताओं, सम्राटों और पुरानी गणनाओं का एक दिलचस्प इतिहास छिपा है।

आइए जानते हैं इन नामों की उत्पत्ति की कहानी:

1. जनवरी (January): वर्ष के पहले महीने का नाम रोमन देवता 'जेनस' (Janus) के नाम पर रखा गया है। रोमन पौराणिक कथाओं में जेनस को 'आरंभ और अंत' तथा 'द्वारों' का देवता माना जाता है। उनके दो चेहरे दर्शाए जाते हैं—एक आगे की ओर (भविष्य) और दूसरा पीछे की ओर (भूतकाल) देखता हुआ। जनवरी का महीना भी ऐसा ही है; यह बीते हुए वर्ष को अलविदा कहता है और नए वर्ष का स्वागत करता है। लैटिन में इसे 'जैनअरिस' कहा गया, जो बाद में जेनुअरी और हिंदी में जनवरी बना।

2. फरवरी (February): इस महीने के नाम का संबंध लैटिन शब्द 'फेब्रुआ' (Februa) से है, जिसका अर्थ है 'शुद्धि' या 'पवित्रता'। प्राचीन रोम में इसी महीने में 'फेब्रुआलिया' नामक शुद्धि का उत्सव मनाया जाता था, जिसमें लोग आने वाले वसंत के लिए खुद को और अपने शहर को पवित्र करते थे। कुछ मान्यताओं के अनुसार, इसका संबंध रोम की देवी 'जूनो फेब्रुआटा' से भी जोड़ा जाता है।

3. मार्च (March): मार्च महीने का नाम रोमन युद्ध देवता 'मार्स' (Mars) के नाम पर रखा गया। प्राचीन रोमन कैलेंडर में वर्ष का प्रारंभ इसी महीने से होता था। सर्दियाँ समाप्त होने के बाद, मौसम अनुकूल होने पर लोग इसी महीने से सैन्य अभियान शुरू करते थे या शत्रु देश पर आक्रमण करते थे। इसलिए युद्ध के देवता के नाम पर इस 'आगे बढ़ने वाले' महीने का नाम पड़ा।

4. अप्रैल (April): इस महीने की उत्पत्ति लैटिन शब्द 'अपेरिरे' (Aperire) से मानी जाती है, जिसका अर्थ है 'खुलना'। रोम में इसी माह कलियाँ खिलकर फूल बनती थीं और वसंत का आगमन पूरी तरह होता था, यानी प्रकृति 'खुलती' थी। इसलिए इसे 'एप्रिलिस' कहा गया। (एक अन्य मतानुसार, इसका नाम प्रेम और सुंदरता की ग्रीक देवी एफ्रोडाइट (जिन्हें रोम में वीनस कहा जाता था) के नाम से भी जुड़ा हो सकता है, क्योंकि यह महीना प्रजनन और प्रेम का प्रतीक था।)

5. मई (May): मई नाम की उत्पत्ति के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला, यह रोमन देवता मरकरी (बुध) की माता और एटलस की पुत्री, देवी 'मइया' (Maia) के नाम पर रखा गया है, जो विकास और पोषण की देवी थीं। दूसरा मत यह है कि यह नाम लैटिन शब्द 'मेजोरेस' (Maiores) से आया है, जिसका अर्थ है 'बड़े-बुजुर्ग' या 'रईस लोग', जिन्हें यह महीना समर्पित था।

6. जून (June): इस महीने के नामकरण के भी दो मत हैं। सबसे प्रचलित मत यह है कि इसका नाम रोमन देवताओं के राजा जुपिटर की पत्नी और विवाह की देवी 'जूनो' (Juno) के नाम पर पड़ा। इसलिए आज भी इस महीने को शादी के लिए शुभ माना जाता है। दूसरा मत यह है कि जैसे मई बुजुर्गों (Maiores) का महीना था, वैसे ही जून युवाओं या 'जूनियर्स' (iuniores) का महीना माना जाता था।

7. जुलाई (July): मूल रोमन कैलेंडर में यह पाँचवाँ महीना था और इसे 'क्विंटिलिस' (Quintilis) कहा जाता था। बाद में, महान रोमन सेनानायक और तानाशाह जूलियस सीजर (Julius Caesar) के सम्मान में इसका नाम बदलकर जुलाई कर दिया गया। सीजर का जन्म इसी महीने में हुआ था।

8. अगस्त (August): यह पहले छठा महीना था और 'सेक्स्टिलिस' (Sextilis) कहलाता था। जूलियस सीजर के दत्तक पुत्र और रोम के पहले सम्राट ऑगस्टस सीजर (Augustus Caesar) ने अपने नाम को अमर बनाने के लिए इसका नाम बदलकर अपने नाम पर 'ऑगस्टस' (अगस्त) कर दिया। उन्होंने इसी महीने में अपनी कई बड़ी जीतें हासिल की थीं।

9. सितंबर (September): यहाँ से नामों का आधार संख्यात्मक हो जाता है। 'सेप्टेम' (Septem) एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है 'सात'। पुराने 10 महीनों वाले रोमन कैलेंडर (जो मार्च से शुरू होता था) में यह सातवाँ महीना था। बाद में जब जनवरी और फरवरी जुड़ने से साल में 12 महीने हो गए, तो यह नौवाँ महीना बन गया, लेकिन नाम वही रहा।

10. अक्टूबर (October): यह नाम लैटिन शब्द 'ऑक्टो' (Octo) पर आधारित है, जिसका अर्थ है 'आठ'। यह पहले आठवाँ महीना था, जो अब दसवाँ महीना है।

11. नवंबर (November): इसका आधार लैटिन शब्द 'नोवेम' (Novem) है, जिसका अर्थ है 'नौ'। यह प्राचीन कैलेंडर का नौवाँ महीना था, जो अब ग्यारहवाँ है।

12. दिसंबर (December): इसी प्रकार, यह नाम लैटिन शब्द 'डेसेम' (Decem) पर आधारित है, जिसका अर्थ है 'दस'। यह पुराने कैलेंडर का दसवाँ और अंतिम महीना था, जो अब वर्ष का बारहवाँ महीना है।

प्रस्तुति : भारत-दर्शन