हिंदी भाषा के लिये मेरा प्रेम सब हिंदी प्रेमी जानते हैं। - महात्मा गांधी।
आँख से सपने चुराने आ गए | ग़ज़ल
आँख से सपने चुराने आ गए
वो हमें अपना बनाने आ गए
कम परेशां थी क्या मेरी ज़िंदगी
उसपे हमको तुम सताने आ गए
मैं तो कुंदन हूँ उन्हें मालूम क्या
आग में मुझको तपाने आ गए
उनका कद हमसे कहीं मिलता नहीं
आईना हमको दिखाने आ गए
जो 'ग़ज़ल' रोहित कही थी आपने
अपनी कह हमको सुनाने आ गए
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)