यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।
सबसे झूठा कौन? (बाल-साहित्य )  Click to print this content  
Author:भारत-दर्शन संकलन

एक बार शेख चिल्ली झज्जर के नवाब के यहाँ नौकरी करने लगे। नवाब साहब शेख चिल्ली को ख़ूब चाहते थे। उन्हें उनकी बातों में बहुत आनंद आता था लेकिन नवाब के छोटे भाई को शेख चिल्ली पसंद नहीं थे।   

एक बार नवाब युद्ध लड़ने के लिए कई महीनों से बाहर गए हुए थे तो सारा कामकाज़ छोटे नवाब यानी नवाब साहब के छोटे भाई देखते थे। छोटे नवाब शेख चिल्ली को मूर्ख और कामचोर मानते थे। एक दिन उन्होंने भरी सभा में शेख चिल्ली को ख़ूब फटकार लगाई और उनका अपमान किया, “एक अच्छा आदमी एक बार बताए काम को ठीक से करता है, और जितना कहा जाए उससे भी अधिक करता है। एक तुम हो जो आसान से आसान काम को भी ढंग से नहीं कर सकते।"

“तुमहें अस्तबल में घोड़ा ले जाने को कहो तो तुम उसे बांधना भूल जाते हो। तुम कोई बोझा उठाते हो तो या तो खुद गिर जाते हो या फिर तुम्हारे पैर लड़खड़ाते हैं! तुम जो काम करते हो, उसे ध्यान लगाकर क्‍यों नहीं करते?” छोटे नवाब ने गरजते हुए सवाल किया। 

शेख चिल्ली मुंह लटकाए चुपचाप खड़े रहे।

कुछ दिनों बाद शेख चिल्ली छोटे नवाब के घर के सामने से होकर जा रहे थे तो उन्हें बुलावा आया और छोटे नवाब ने उन्हें कोई हकीम बुलाने को कहा, “जल्दी किसी अच्छे हकीम को बुलाकर लाओ। बेगम बहुत बीमार हैं।”

“जी सरकार।” कहकर शेख चिल्‍ली झट से आदेश का पालन करने चल दिया। थोड़ी ही देर में एक हकीम, एक कफन बनानेवाला और दो कब्र खोदने वाले मजदूर भी वहां पहुंच गए।

“यह सब क्‍या हो रहा है?” छोटे नवाब ने गुस्से में पूछा “मैंने तो सिर्फ एक हकीम को बुला लाने के लिए कहा था। बाकी लोगों को कौन बुलाकर लाया?"

“सरकार! मैं ही लाया हूँ।” शेख चिल्ली ने कहा, “आपने ही तो कहा था कि एक अच्छा आदमी बताए गए काम से भी ज्यादा काम करता है।"

"मैंने सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। अल्लाह करे कि बेगम साहिबा जल्दी से ठीक हो जाएं पर बीमारी में क्या हो जाए, यह किसे पता!”

छोटे नवाब ने शेख चिल्ली को बुरा-भला कहकर वहाँ से चले जाने को कहा। 

एक दिन छोटे नवाब ने एक प्रतियोगिता रखी। इस प्रतियोगिता मैं सबसे बड़ा झूठ बोलने वाले को विजयी घोषित किया जाना था। जीतने वाले को सोने की एक हजार दीनारें पुरस्कार में दिए जाने की घोषणा की गई।

कई झूठ बोलने में माहिर लोग इनाम पाने के चाह में सामने आए। एक ने कहा, “सरकार, मैंने भेंसों से भी बड़ी चींटियां देखीं हैं, जो एक बार में चालीस सेर दूध देती हैं!"

“क्यों नहीं!” छोटे नवाब ने कहा, “यह संभव है।”

“सरकार, हर रात मैं चंद्रमा तक उड़ते हुए जाता हूँ और सुबह होने से पहले ही उड़कर वापिस आ जाता हूँ।” दूसरे ने डींग हांकी।

“अच्छा!” छोटे नवाब मुस्कुराए, “हो सकता है तुम्हारे पास कोई रहस्यमयी ताकत हो।”

“सरकार!" एक तोंद निकले मोटे आदमी ने कहा, “जबसे मैंने एक तरबूज के कुछ बीज निगले हैं तब से मेरे पेट में छोटे-छोटे तरबूज पैदा हो रहे हैं। जब कोई तरबूज पक जाता है तो वो फूट जाता है और उससे मुझे अपना भोजन मिल जाता है। अब मुझे और कुछ खाने की जरूरत ही नहीं पड़ती है।”

“तुमने किसी खास किस्म के तरबूज के बीज निगल लिए होंगे।" छोटे नवाब ने बिना पलकें झपकाए उसकी ओर देखते हुए कहा।

“सरकार! क्या मुझे भी बोलने की इजाजत है?” पीछे खड़े शेख चिल्ली ने पूछा।

“ज़रूर।" छोटे नवाब ने ताना कसने के अंदाज़ में कहा, “तुमसे हम किन प्रतिभाशाली शब्दों की उम्मीद करें?"

“सरकार!” शेख चिल्ली ने एक ही सांस में बड़े जोर से कहा, “आप इस पूरे राज्य के सबसे बड़े बेवकूफ आदमी हैं। आपको नवाब के सिंहासन पर बैठने का कोई हक नहीं है।"

राजसभा में सन्नाटा छा गया। छोटे नवाब चिल्लाए, “सिपाहियो, इस नाचीज को गिरफ्तार कर लो!"

शेख चिल्ली को पकड़ लिया गया और खींचकर राजा के आगे लाया गया।

“निकम्मे, बेशरम!” छोटे नवाब का गुस्सा उबल पड़ा, “तुम्हारी यह जुर्रत! अगर तुमने इसी वक्‍त हमारे पैरों में गिरकर माफ़ी नहीं मांगी तो तुम्हारा सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा!”

“...पर सरकार!” शेख चिल्ली ने इत्मिनान से कहा, “आपने ही तो कहा था कि आप दुनिया का सबसे बड़ा झूठ सुनना चाहते हैं!” फिर शेख चिल्ली छोटे नवाब को देखते हुए बोला, “जो कुछ मैंने कहा उससे बड़ा क्या कोई और झूठ हो सकता है?"

छोटे नवाब को चक्कर में पड़ गए कि क्या करें! उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि शेख चिल्‍ली अब झूठ बोल रहा है या पहले झूठ बोल रहा था! शेख चिल्ली उतना बड़ा बेवकूफ नहीं था जितना छोटे नवाब और कुछ लोग उसे समझते थे।

छोटे नवाब धीमे से हँसे और बोले, “शाबाश! तुम जीते!”

सब लोगों ने शेख चिल्‍ली की अकल को सराहा। 

'छोटे नवाब चाहें थोड़े बेवकूफ हों परंतु वे हैं दिलदार!' शेख चिल्ली सोने की हजार दीनारें लेकर घर को चल दिया।  

[शेख चिल्ली के कारनामें]

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