भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।
झिलमिल आई है दीवाली
जन-जन ने हैं दीप जलाए
लाखों और हजारों ही
धरती पर आकाश आ गया
सेना लिए सितारों की
छुप गई हर दीपक के नीचे
देखो आज अमावस काली
सुंदर-सुंदर दीपों वाली
झिलमिल आई है दीवाली
[भारत-दर्शन संकलन]
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)