विदेशी भाषा के शब्द, उसके भाव तथा दृष्टांत हमारे हृदय पर वह प्रभाव नहीं डाल सकते जो मातृभाषा के चिरपरिचित तथा हृदयग्राही वाक्य। - मन्नन द्विवेदी।
 
न्याय  (कथा-कहानी)     
Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

एक खरगोश भेड़िये से तंग था। उसे किसी ने सलाह दी कि जंगल के 'प्रधान जी' से मिले।

भोला-भाला खरगोश 'प्रधान जी' से मिला। उसने 'प्रधान जी' को मदद की गुहार लगाई। उसकी भोली-भाली सूरत देखकर शेर को बड़ी दया आयी। 'इसकी मुलायम-मुलायम त्वचा कितनी स्वादिष्ट होगी!' दया सिसक उठी और-----!

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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